अदालत एआई (Adalat AI) क्या है और यह कैसे काम करता है?

अदालत एआई (Adalat AI) भारत में बना एक आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। इसे कानूनी कामकाज को आसान और तेज बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह कोर्ट में बोली जाने वाली बातों को तुरंत सटीक टेक्स्ट में बदलता है। साथ ही केस की फाइलों को डिजिटल तरीके से मैनेज करता है।
इसके फाउंडर उत्कर्ष सक्सेना और अर्घव भट्टाचार्य हैं। इसका संचालन LEGSYS.AI TECHNOLOGY FOUNDATION करता है। इसका मुख्य लक्ष्य निचली अदालतों में सालों से पेंडिंग पड़े मुकदमों के बोझ को कम करना है।
कोर्ट-कचहरी का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में क्या आता है?
तारीख पर तारीख। धूल खाती मोटी-मोटी फाइलें, वकीलों की लंबी बहस, और इंसाफ के इंतजार में बूढ़े होते लोग।
हम सबने यह सब फिल्मों में देखा है और असल जिंदगी में महसूस भी किया है। जब कोई केस कोर्ट में जाता है, तो फैसला आने में कई साल लग जाते हैं।
कभी गवाही दर्ज होने में देरी होती है। कभी आदेश की कॉपी मिलने में महीनों बीत जाते हैं।
लेकिन सोचिए, क्या तकनीक इस पुराने ढर्रे को बदल सकती है?
जवाब है- हाँ।
आज हम बात कर रहे हैं अदालत एआई (Adalat AI) की। यह भारत का अपना एक ऐसा एआई स्टार्टअप है, जो अदालतों के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है।

अदालत एआई की शुरुआत कैसे हुई?
हाल ही में जब मैंने इस स्टार्टअप के बारे में जाना, तो मुझे लगा कि हमारे देश को सच में इसकी सख्त जरूरत थी।
सुप्रीम कोर्ट भी कई बार निचली अदालतों में बढ़ते मुकदमों पर चिंता जता चुका है। हमारे देश की अदालतों में करोड़ों केस पेंडिंग हैं। इस गंभीर समस्या को सुलझाने के लिए दो भारतीय युवाओं ने बीड़ा उठाया।
इनका नाम है उत्कर्ष सक्सेना और अर्घव भट्टाचार्य।
इन दोनों ने मिलकर अदालत एआई की नींव रखी। इसे LEGSYS.AI TECHNOLOGY FOUNDATION के तहत विकसित किया गया है।
इनका विज़न बिल्कुल साफ है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से न्याय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना।
अदालतों में असल दिक्कत क्या आती है?
जब जज साहब कोर्ट रूम में बैठते हैं, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल कानून की नहीं होती। सबसे बड़ी चुनौती रोजमर्रा के कागजी झंझटों की होती है:
- स्टेनोग्राफर की भारी कमी: कोर्ट में अक्सर टाइपिस्ट या स्टेनोग्राफर नहीं होते। ऐसे में जज साहब को सुबह से शाम तक खुद अपने हाथ से नोट्स और आदेश लिखने पड़ते हैं।
- हैंडराइटिंग की उलझन: जब एक जज का ट्रांसफर होता है, तो नए जज के लिए पुराने जज के हाथ के लिखे नोट्स पढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। कई बार तो शब्द समझ ही नहीं आते।
- फाइलों का पहाड़: हर दिन एक कोर्ट में 100 से ज्यादा केस लिस्ट होते हैं। पुरानी फाइलें, पुराने आदेश और सबूत ढूँढने में कोर्ट स्टाफ का आधा दिन निकल जाता है।
- भाषा और अनुवाद की समस्या: हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं। दस्तावेजों का सही और समय पर अनुवाद न होना भी केस को लटका देता है।
इन्हीं क्लर्कियल और मैन्युअल दिक्कतों की वजह से एक छोटे से केस में भी कई साल लग जाते हैं।
अदालत एआई कैसे काम करता है?
अदालत एआई कोई जादुई छड़ी नहीं है, बल्कि यह एक बेहद स्मार्ट और प्रैक्टिकल टूल है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह कैसे काम करता है:
1. बोलते ही रियल-टाइम में टाइपिंग (Speech-to-Text)
कोर्ट रूम में जैसे ही गवाह कुछ बोलता है या वकील साहब दलील देते हैं, अदालत एआई उसे तुरंत सुनता है। यह बोले गए हर शब्द को आपकी भाषा में स्क्रीन पर टाइप कर देता है।
अब जज साहब को हाथ से लिखने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कोर्ट का कीमती समय बचता है और हर एक बयान का सटीक रिकॉर्ड तैयार होता है।
2. केस फ्लो मैनेजमेंट सिस्टम
यह जजों के लिए एक ऑल-इन-वन डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरह है।
मान लीजिए आज जज साहब के सामने 80 केस लगे हैं। उन्हें किसी अलमारी से कागज़ मंगाने की ज़रूरत नहीं है। स्क्रीन पर एक क्लिक करते ही उस केस की पिछली सारी हिस्ट्री, पुराने आदेश और जरूरी कागजात सामने आ जाते हैं।
इससे तारीख लगाना और सुनवाई आगे बढ़ाना बहुत आसान हो जाता है।
3. ऑटोमैटिक ट्रांसलेशन और समरी
यह सिस्टम अदालती कागजों का अनुवाद भी आसानी से कर सकता है। साथ ही, सैकड़ों पन्नों की लंबी चार्जशीट या पुरानी फाइलों का छोटा और सटीक सारांश (Summary) बना देता है। इससे जज और वकील दोनों का समय बचता है।
मोबाइल ऐप के जरिए भी उपलब्ध
अदालत एआई को सिर्फ बड़े कंप्यूटरों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे मोबाइल ऐप के तौर पर भी पेश किया गया है, ताकि इसका इस्तेमाल कहीं भी किया जा सके:
- ऐप का नाम: Adalat AI
- प्रदाता: LEGSYS.AI TECHNOLOGY FOUNDATION
- करंट वर्ज़न: 3.0.2
- डाउनलोड साइज: मात्र 58 MB
- सपोर्ट: Android 7.0 और उससे ऊपर के सभी सामान्य स्मार्टफोन्स पर यह आसानी से काम करता है।
गूगल प्ले स्टोर पर इसके 5,000 से ज्यादा डाउनलोड्स हो चुके हैं। इसका हल्का साइज और सरल इंटरफेस इसे यूज़ करने में बेहद आसान बनाता है।
आम इंसान के लिए इसका क्या फायदा है?
सीधी सी बात है- जब कोर्ट का क्लर्कियल समय बचेगा, तो न्याय जल्दी मिलेगा।
- जो केस सिर्फ तारीखों की वजह से 5 साल तक खिंचते थे, उनका निपटारा अब कुछ महीनों में हो सकेगा।
- अदालती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
- हाथ से लिखे कागजों के खोने या खराब होने का डर खत्म हो जाएगा।
- न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
निष्कर्ष
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल चैट करने या फोटो बनाने का खिलौना नहीं है। इसका असली मकसद इंसानी जिंदगी की मुश्किलों को आसान बनाना है।
अदालत एआई इस बात का जीता-जागता सबूत है। उत्कर्ष सक्सेना और अर्घव भट्टाचार्य की यह भारतीय पहल हमारी न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा दे रही है।
अगर यह तकनीक देश की हर छोटी-बड़ी अदालत तक पहुँच जाए, तो आने वाले समय में “तारीख पर तारीख” का दौर हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अदालत एआई (AI Adalat) क्या है?
अदालत एआई भारत में बना एक लीगल-टेक प्लेटफॉर्म है, जिसे LEGSYS.AI Technology Foundation ने तैयार किया है।
यह कोर्ट में बोली जाने वाली गवाही और बहसों को रियल-टाइम में टाइप करता है। साथ ही यह केस फाइलों को डिजिटल तरीके से मैनेज करके मुकदमों के जल्द निपटारे में जजों और वकीलों की मदद करता है।
क्या कोर्ट में एआई वकील की अनुमति है?
बिलकुल नहीं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों और भारतीय कानूनों के तहत कोई भी रोबोट या एआई सिस्टम वकालत नहीं कर सकता और न ही कोर्ट में किसी मुवक्किल का केस लड़ सकता है।
अदालत एआई जैसा टूल सिर्फ क्लर्कियल मदद, ट्रांसक्रिप्शन और कानूनी रिसर्च को आसान बनाने के लिए है।
अदालत एआई के फाउंडर कौन हैं?
अदालत एआई की शुरुआत उत्कर्ष सक्सेना (CEO) और अर्घव भट्टाचार्य (CTO) ने मिलकर की है।
अदालत एआई को फंडिंग कहाँ से मिलती है?
अदालत एआई का संचालन नॉन-प्रॉफ़िट LEGSYS.AI Technology Foundation के ज़रिये होता है। इसे तकनीक और न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए Y Combinator, Fast Forward और कई वैश्विक टेक ग्रांट्स से वित्तीय सहयोग मिला है।
अदालत एआई ऐप कहाँ से डाउनलोड करें?
अदालत एआई ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसे LEGSYS.AI TECHNOLOGY FOUNDATION नाम से लिस्ट किया गया है और यह Android 7.0 या उससे ऊपर के स्मार्टफोन्स पर काम करता है।



